शनिवार, अगस्त 30, 2008

पानी पानी रे ...

जरा सोचिये ...........
कहने के लिए कुछ नही है ॥
........बस सोचिये ...
क्योकि आप इससे जयादा कुछ नही कर सकते ......

" प्रकृति का कहर
फ़िर एक बार
टूट पड़ा
चैन की नींद
सो रहे लोगो का
जल प्रलय से
कलेजा फट पड़ा
बह गई जिसमे उम्मीद
अपने भी बिछड़ गए
तिनको से बना आसियाना
अब बिखर गया
बिलखते बच्चे
पिता का धैर्य
माँ की ममता
तार तार हो गई .........

मंगलवार, जून 24, 2008

हर रोज खुलेगे ऐक नई पोल

सबसे पहले खुलेगे इनकी पोल
पुलिस
पत्रकार
कोचिंग सान्चालक
नेता
डॉक्टर
और आप की भी ========

सोमवार, जून 23, 2008

अब रोज खुलेंगे पोल

हमारी कोशीस बस इतनी है की आप बिंदास बोलो ।